आया शरण ठोकरें जग की खाके aaya sharan thokre jag ki khaake

by - December 26, 2019

आया शरण ठोकरें जग की खाके
हटूगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके
आया शरण ठोकरें जग की खाके

पहले मगन हो सुखी नींद सोया
सब कुछ पाने का सपना संजोया
मिला तो वही जो लाया लिखा के
आया शरण ठोकरें जग की खाके
हटूगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके

मान ये काया का है बस छलावा
रावण का मान भी बचने न पाया
रखूंगा कहां तक मैं खुद को बचाके
आया शरण ठोकरें जग की खाके
हटूगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके

करर्मों की लीला बड़ी है निराली
हरिश्चंद्र मरघट की करे रखवाली
समझ में ये आया सब कुछ लुटा के
आया शरण ठोकरें जग की खाके
हटूगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके

ना है चाह कोई न है कोई इच्छा
अपनी दया की मुझे देदो भिक्षा
जिसे सबने छोड़ा उसे तूही राखे
आया शरण ठोकरें जग की खाके
हटूगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके


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