वही श्याम है -- वही घनश्याम है vahi shyam hai vahi ghanshyam hai

by - December 24, 2019

सबको नाच नचाता नजर नहीं जो आता
ऐसी दुनिया को बनाने वाला कौन है
वही श्याम है -- वही घनश्याम है
सबको नाच नचाता नजर नहीं जो आता

अंबर से पानी बरसाता
पत्थर में जो फूल खिलाता
ऐसी दुनिया को बनाने वाला
कौन है बतलाओ तो कौन है
सबको नाच नचाता नजर नहीं जोआता
वही श्याम है -- वही घनश्याम है

माला घुमाने से वह नहीं मिलता
वह नहीं मिलता भस्म लगाने से
वो ही पिता है वो ही माता
वही सबका भाग्य विधाता
ऐसा सृजन हारा सबका प्यारा कौन है
वही श्याम है --- वही घनश्याम है

एक है राजा एक भिखारी
एक अछूत और एक पुजारी
यह भेद पापी हमने बनाए हैं
वह तो सबके तन में समाया
सबको एक प्यार से सींचा
कोई ऊंचा ना कोई नीचा
ऐसा एक समान समझने वाला कौन है
वही श्याम है--- वही घनश्याम है


You May Also Like

0 comments

Contact Form

Name

Email *

Message *