राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा raam sumir ke raham kare naa kaise sukh paayega
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
कृष्ण सुमिर के कर्म करे ना यूंही जगसे जाएगा
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
भगवानको भजनेवाले क्या भगवानको जानाहै
पास पड़ोस दीनों में क्या उसको पहचाना है
जब तक खुदी ना टूटे प्रभु नजर ना आएगा
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
ये संसार कर्मों की खेती जो बोए वही पाए
प्यार से सीचले जीवन अवसर फिर ना आए
चार दिनों का जीवन है कबतक ठोकर खाएगा
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
अंतर तेरे अंतर्यामी रोज तुझे समझाता है
भलाबुरा क्या करना है राह तुझे दिखलाता है
मन की कही पर चलने वाले पीछे पछतायेगा
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
शरण गए बिन जाप निष्फल है जीवन तेरा
जन्म मरण की आस न टूटे दुखों ने नित घेरा
पाप गठरिया भारी होगई कैसे बोझ उठाएगा
राम सुमिर के रहम करे ना कैसे सुख पायेगा
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