दो दिन का जगत में मेला do din ka jagat mei mela
दो दिन का जगत में मेला
सब चला चली का खेला
दो दिन का जगत में मेला
कोई चला गया कोई जावे
कोई गठरी बांध के सिधारे
कोई खड़ा है तैयार अकेला
सब चला चली का खेला
कर पाप कपट छल माया
धन लाख करोड़ कमाया
संग चले ना एक अधेला
सब चला चली का मेला
सुत नारी मात पिता भाई
कोई अंत सहायक नाई
फिर क्यों भरता पाप का ढेला
सब चला चली का मेला
ये तो है नश्वर सब संसारा
करले भजन राम का प्यारा
ब्रह्मानंद कहे सुन चेला
सब चला चली का मेला
0 comments