बजरंगी की पूजा होती मंगल और शनिवार bajrangi ki pooja hoti mangal aur shanivaar
बजरंगी की पूजा होती मंगल और शनिवार
मेहंदीपुर लगाके बैठे बालाजी अपना दरबार
बजरंगी की पूजा होती मंगल और सलवार
हाथ में मुगधर लाल लंगोटा रूप विशाल
ये अनुपम बलकारी मारुति नंदन बेमिसाल
चैत्र सुदी पूनम को जन्मे महिमा अपरंपार
मेहंदीपुर लगाके बैठे बालाजी अपना दरबार
प्रभु राम का जिसने भी गुण गाया है
बजरंगी ने उसको अपने गले लगाया है
लेकर शरण में उसको कर देते उद्धार
मेहंदीपुर लगाके बैठे बालाजी अपना दरबार
कैसी भी हो बिपदा उसे दूर भगाते हैं
इसीलिए वह संकट मोचन कहलाते हैं
नर तो क्या नारायण भी माने इसका उपकार
मेहंदीपुर लगाके बैठे बालाजी अपना दरबार
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