तुम हमको समझाते फिरभी समझ न पाते tum humko samjhate fir bhi samajh na paate
तुम हमको समझाते फिरभी समझ न पाते
ये कैसा दोष हमारा हम गलती करते जाते
तुम हमको समझाते फिरभी समझ न पाते
नादानी जीको जलाए व्याकुलता बढ़ती जाए
ये बैरी मन मेरा मुझे क्या क्या रंग दिखाए
रंगो के रंग महल में हमें नित नये सपने आते
ये कैसा दोष हमारा हम गलती करते जाते
निश्चय अटल बनादे विश्वास का रंग चढ़ादे
गुण गाऊँगा मैं तेरा मेरे सारे दोष मिटादे
निर्बलतासे मैं हारा मुझे क्यों न सफल बनाते
ये कैसा दोष हमारा हम गलती करते जाते
प्रभु हार गया मैँ आओ आके सबल बनाओ
दामन अंसुअन से भीगा यूं ना आजमाओ
है शर्म प्रभु हमें खुद पर फिर भी चलते जाते
ये कैसा दोष हमारा हम गलती करते जाते
तुम हमको समझाते फिर भी समझ न पाते
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