मुझे वृंदावन बसाया ये कृपा नहीं तो क्या है mujhe vrindavan bulaya ye kripa nahi to kya hai
मुझे वृंदावन बसाया ये कृपा नहीं तो क्या है
सोए भाग्यको जगाया ये कृपा नहीं तो क्या है
मुझे वृंदावन बसाया ये कृपा नहीं तो क्या है
भटका था दर बदर विषयों में मन फंसा के
विषयों से मन हटाया ये कृपा नहीं तो क्या है
मुझे वृंदावन बसाया ये कृपा नहीं तो क्या है
मैं भूल करके तुमको सुख चैन सारा खोया
इस जंजाल से बचाया ये कृपा नहीं तो क्या है
मुझे वृंदावन बसाया ये क्रपा नहीं तो क्या है
ऐसा लगाया चस्का प्रभु अपने ही प्रेम रस का
पागल मुझे तूने बनाया ये कृपा नहीं तो क्या है
मुझे वृंदावन में बसाया ये कृपा नहीं तो क्या है
सोए भाग्य को जगाया ये कृपा नहीं तो क्या है
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