तुम ढूंढों मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
तुम ढूंढों मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥--(१), (१)
सुध लो मोरी......,
सुध लो मोरी गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥--(1,1)
तुम ढूंढों मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
सुध लो मोरी गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
1. पाँच विकार से हांकी जाये, पाँच तत्व की ये धेरी ॥--(१), (१)
बरबस भटकी दूर कहीं मैं, चैन ना पाऊँ, अब केरी ॥--(१), (१)
ये कैसा मायाज़ाल, मैं उलझी गैया तेरी ॥--(१), (१)
सुध लो मोरी गोपाल, मैं उलझी गैया तेरी ॥
तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥--(२)
2. जमुना तट ना, नंदन वट ना, गोपी-ग्वाल कोई दिखे ॥--(१), (१)
कुसुम लता ना, तेरी छटा ना, पान-पखेरु कोई दिखे ॥--(१), (१)
अब सांझ भई घनश्याम, मैं व्याकुल गैया तेरी ॥--(१), (१)
सुध लो मोरी गोपाल, मैं व्याकुल गैया तेरी ॥
तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
3. कित पाऊँ तरुवर की छांव, जित साजै कृष्ण-कन्हैया ॥--(१), (१)
मन का ताप-श्राप भटकन का, तुम्हीं हरो हर रास रचैया ॥--(१), (१)
अब खुब निहारुँ बाट प्रभु जी, मैं खोई गैया तेरी ॥--(१), (१)
सुध लो मोरी गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
4. बंशी के स्वर नाद से तेरो, मधुर तान से मुझे पुकारो ॥--(१), (१)
मुझे उबारो हे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
सुध लो मेरी गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
सुध लो मोरी गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
॥ तुम ढूंढो मुझे गोपाल, मैं खोई गैया तेरी ॥
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