ओ साईंनाथा मेरे साईंनाथा

by - December 17, 2019

मेरे मालिक मेरे मौला
ऐ मेरे साईं खुदा
तेरे ही कारण ये जन्नत सी जमीं और आसमां
तेरा ही दीदार हो हम सब को दिन की हर सुबह
ओ साईंनाथा मेरे साईंनाथा ॥
फूल की हर पत्तियों में तू ही तो मुस्काए
सूर्य की भांति ये ज्योति में भी साईं समाये
तू यहाँ भी और वहां भी हर जगह दिखता है
तू ही धरती तू ही अम्बर तू ही चारों दिशाएँ
हर घडी साईं ही साईं नाम ये जपती फिजां
ओ साईंनाथा मेरे साईंनाथा ॥
जग ये नश्वर तन ये नश्वर और बचा फिर क्या यहाँ
पर तुम्हारा नाम साईं युगों युगों से है यहाँ
तू ही मुक्ति धाम साईं तू ही अंतर आत्मा
तू बसा हर प्राण में हर प्राणी की तू प्रेरणा
तू ही है ईश्वर हमारा तू ही है साईं खुदा
ओ साईंनाथा मेरे साईंनाथा ॥
तू अमावस को भी कर दे पूर्ण चन्द्र की पूर्णिमा
तू सितारों से सजा दे हर दिलों का आसमां
नाम में संजीवनी जादू सी तेरे हाथ में
इसलिए बिन बाती चमकी द्वारका उस रात में
तुझ में ही राधा रमण और तुझ में ही अल्लाह रखा
ओ साईंनाथा मेरे साईंनाथा ॥

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