राधा राधा रटत ही, सब ब्याधा मिट जाय ।

by - December 10, 2019


राधा राधा रटत ही, सब ब्याधा मिट जाय ।
कोटि जन्म की आपदा, श्रीराधा नाम ते जाय ॥
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वृन्दावन सो वन नहीं, नन्दगाँव सो गाँव ।
बन्सीवट सो वट नहीं, कृष्ण नाम सो नाम ॥
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राधे तू बडभागिनी, कौन तपस्या कीन।
तीन लोक तारण तरण खुद तेरे आधीन॥
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वृन्दावन बानिक बन्यो, जहाँ भ्रमर करत गुंजार ।
दुल्हिन प्यारी राधिका, दूल्हा नन्दकुमार ॥
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वृन्दावन के वृक्ष को, मरम न जाने कोय ।
जहाँ डाल डाल और पात पे, श्री राधे राधे होय ॥
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करुणा कर मम स्वामिनी, तुम पकड़ो मेरो हाथ ।
कृपा करो मम स्वामिनी, जान अपनी दास ॥
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राधे से रस ऊपजे, रस से रसना गाय ।
कृष्णप्रियाजू लाड़ली, तुम मोपे रहियो सहाय ॥
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गोविन्द भारी भीड़ में, मैं सुमिरून प्रभु तोय ।
पक्ष करी प्रह्लाद की, यही करो सो मोय ॥
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