दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
मुक्त कंठ से राम नाम को संतों ने है गाया
सियाराम बिना दुख कौन हरे --दुख कौन हरे
दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
कणकण में रामका दर्शन जिसने जगत बनाया
राम नाम की दो अखियां जिसमें राम समाया
राम समाये इन अंखियों में मन मेरा हरषाया
दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
सीता भी है दो अक्षर की जिसमें राम समाये
सीता राम पतित पावन हें पाप कटें जो गाये
हिय में सीताराम बसाके मन मोरा सुख पाया
दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
उल्टा जपने वालों ने भी सदगति इससे पाई
सब वेदों में राम सार है कह गए भक्त गुसाईं
घर घर राम का दीप जला है परमानंद है छाया
दो अक्षर का रामनाम है जिसमें जग है समाया
मुक्त कंठ से राम नाम को संतों ने है गाया
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