किसी को हंसाए किसी को रुलाए kisi ko hasaye kisi ko rulaaye

by - December 23, 2019

किसी को हंसाए किसी को रुलाए
कहीं बेर खाए कहीं पग धुलाए
तुलसी के रघुवर संतो के प्यारे
भक्तों के संकट तुम्हीं ने मिटाए

आए तारण तरण आए संकट हरण
दास आया विभीषण तुम्हारी शरण
दिया राज उसको गले से लगाया
तुमसा न कोई मुझे नाथ भाए
भक्तों के संकट तुम्ही ने मिटाए

ताड़का का वध किया अहिल्या तारी
तोड़ दिया शिव धनुष और बिपदा हरी
परशुराम ने भी चरण चिन्ह पाया
पड़ा था शरण में मस्तक झुकाए
भक्तों के संकट तुम्ही ने मिटाए

पादुका ले भरत आंसू पीता रहा
चौदह वर्ष तक भरत जीता रहा
कठिन कर तपस्या किया त्याग सच्चा
पवन पुत्र को तुमने हृदय बसाए
किसी को हंसाए किसी को रुलाए
भक्तों के संकट तुम्हीं ने मिटाए


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