मातपिता की सेवा जैसा दूजा कोई काम नहीं है Maatpita ki sevaa jaisa dujaa koi kaam nahi hai

by - December 23, 2019

मातपिता की सेवा जैसा दूजा कोई काम नहीं है
समझ तेरे राम यही है कि राधेश्याम यही है
मातपिता की सेवा जैसा दूजा कोई काम नहीं है

घर एक मंदिर तेरा मात पिता ही भगवान है
जो ना ये समझे प्राणी वो बड़ा ही नादान है
धरम -करम में बंदे तू क्यों घिरता है
दर-दर क्यों फिरता है कि चारों धाम यही है
समझ तेरे राम यही है कि राधेश्याम यही है

सुनले रे प्राणी तुझको सारे ये वेद बताएं रे
मात पिता के तन मन में सारे देव समाए रे
सारे देव तू यहीं मनाले इनको शीश झुकाले
तेरा मुकाम यही है कि चारों धाम यही है
समझ तेरे राम यही है कि राधेश्याम यही है

तू क्यों भटकता डोले राम मिलन की आस में
बाहर यह नहीं दीखे रहते हैं तेरे ही पास में
मात पिता सेवा करके खुशियों से झोली भरले
तेरा सुखधाम यही है कि चारों धाम यही है
समझ तेरे राम यही है कि राधेश्याम यही है

करले तू सच्ची सेवा छोड़के सारे काम रे
इन्हीं की शरण में मिल जाएगा सुखधाम रे
दरदर ठोकर क्यों खाता है बाहर क्यों जाता है
बन्दे सब आराम यही है कि चारों धाम यही है
समझ तेरे राम यही है कि राधेश्याम यही है


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