गुरु वचनों को रखना संभाल के guru vachno ko sambhal ke
गुरु वचनों को रखना संभाल के
इक इक वचन में गहरा राज है
जिसने जानी है महिमा गुरु की
उसका डूबा कभी न जहाज है
दीप जले और अंधेरा मिटे ना
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता
ज्ञान सुने और विवेक न जगे
ऐसा भी कभी नहीं हो सकता
जिसकी रोशनी से रोशन जहान है
वो फरिश्ता बड़ा ही महान है
जिसने जानी है महिमा गुरु की......
बीज पड़े और अंकुर न फूटे
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता
कर्म करे और फल ना भोगे
ऐसा भी कभी नहीं हो सकता
कर्म करने को तू होशियार है
फल भोगने में बड़ा ही लाचार है
जिसमें जानी है महिमा गुरु की......
गुरु परिपूर्ण समर्पित तू होजा
धोखा कभी नहीं खा सकता
लक्ष्मण रेखा सत्संग की हो तो
रावण कभी नहीं आ सकता
अबतो हर पल होता आभास है
गुरु सदा ही हमारे साथ है
जिसने जानी है महिमा गुरु की
उसका डूबा कभी न जहाज है
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