मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
गिरधारी मेरे गिरधारी श्याम बनवारी
मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
मन मंदिर में घोर अंधेरा
दीप इसमें कभी न जलता
आकर के ज्योत जलाओ कन्हैया गिरधारी
मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
बहुत दिनों से ढूंढ रही हूं
ढूंढत ढूंढत हार गई हूं
आकरके दरश दिखाओ कन्हैया गिरधारी
मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
गहरी नदिया नाव पुरानी
खेवनहारा थक गया स्वामी
आकर के पार लगाओ कन्हैया गिरधारी
मुझे केवल आस तुम्हारी कन्हैया गिरधारी
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