भोले भांग तुम्हारी मैं घोंटत घोंटत हारी
भोले भांग तुम्हारी मैं घोंटत घोंटत हारी
मेरे सगरे हाथ दुखाए
तेरी एक दिना की होय तो घोटूं
रोज रोज ना घोटी जाए
भोले भांग तुम्हारी मैं घोंटत घोंटत हारी
सुन गणपतकी महतारी घोटों भांग हमारी
बिना भांग रहा नहीं जाए
गौरा तोकूँ छोड़ दूं पर भांग न छोड़ी जाए
तेरी एकदिना की होय तो घोटूं
रोजरोज ना घोंटी जाए भोले भांग तुम्हारी
जा दिनसे मैं ब्याहके आई भाग हमारे फूटे
राम करे यह सिल बट्टा टूटे
रोजरोज की धोंसधपड मोपे सही ना जाये
तेरी एक दिना की होय तो घोटूँ
रोजरोज ना घोंटी जाये भोले भांग तुम्हारी
शंकरने क्रोध में आकर खोला अपना झोला
चरसकी पुड़ियानिकाली एक भांगका गोला
गोला गोली खा भोला क्रोध में आकर बोला
गोरा तोकूँ छोड़ दूं पर भांग ना छोड़ी जाए
भोले भांग तुम्हारी मैं घोंटत घोंटत हारी
कितने साधू चले गए पीकर भांग तुम्हारी
दुनिया तेरे द्वारे आए तू क्यों ना पर्वत जाए
भोलेनाथ रंगेश्वर मैं सबको भांग पिलाए
भोले भांग तुम्हारी मैं घोंटत घोंटत हारी
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