अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती

by - January 20, 2020

अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती
चढी है भोले तेरे नाम वाली मस्ती
अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती
तीन लोक के तुम स्वामी
कर दो क्रपा अन्तर यामी
त्रिशूल धारी हे त्रिपुरारी
भोले वाबा कर उपकारी
डमरू बजा के झंकार दो
भव तार दो भव तार दो
तेरा जलवा जब हैं पाते
गम के बादल छंट छंट ज़ाते
ज़टा में तेरी गंगा है साजे
माथे चन्दा नाग गले विराजे
भंगपीकर प्याला मस्ती शुमारदो
भव तार दो भव तार दो
ओमकार की अदभुत शक्ती
अर्ध नारेश्वर शिवा है शक्ती
दुनिया गाये गाथा त्रिकाल की
भ़टक रहा हूँ मैं भोले कबसे
मेरा ये जीवन संवार दो
भव तार दो भव तार दो


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