अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती
अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती
चढी है भोले तेरे नाम वाली मस्ती
अजब है रुप और अजब तेरी मस्ती
तीन लोक के तुम स्वामी
कर दो क्रपा अन्तर यामी
त्रिशूल धारी हे त्रिपुरारी
भोले वाबा कर उपकारी
डमरू बजा के झंकार दो
भव तार दो भव तार दो
तेरा जलवा जब हैं पाते
गम के बादल छंट छंट ज़ाते
ज़टा में तेरी गंगा है साजे
माथे चन्दा नाग गले विराजे
भंगपीकर प्याला मस्ती शुमारदो
भव तार दो भव तार दो
ओमकार की अदभुत शक्ती
अर्ध नारेश्वर शिवा है शक्ती
दुनिया गाये गाथा त्रिकाल की
भ़टक रहा हूँ मैं भोले कबसे
मेरा ये जीवन संवार दो
भव तार दो भव तार दो
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