प्रेम के सिंधु दीन के बंधु

by - January 20, 2020

प्रेम के सिंधु दीन के बंधु
दुख दारिद्र विनाशक रे
हे जग त्राता विस्व विधाता
हे सुख शांति निकेतन रे
नित्य अखंड अनंत अनादि
पूरण परम ब्रह्म सनातन रे
हे जग त्राता विस्व विधाता
हे सुख शांति निकेतन रे
जगश्रेय जगतपति जगवंदन
अनुपम अलख निरंजन रे
हे जग त्राता विस्व विधाता
हे सुख शांति निकेतन रे
प्रेम सखा त्रिभुवन प्रतिपालक
मेरे जीवन के अबलम्बन रे
हे जग त्राता विस्व विधाता
हे सुख शांति निकेतन रे


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