तेरे जैसा राम भगत कोई
तेरे जैसा राम भगत कोई
हुआ न होगा मतवाला
एक ज़रा सी बात की खातिर
सीना फाड दिखा डाला
आज अवध की शोभा लगती
स्वर्ग लोक से भी प्यारी
चौदह वर्षो बाद राम की
राज तिलक की है तैयारी
हनुमत के दिल की मत पूछो
झूम रहा है वो मतवाला
एक ज़रा सी बात की खातिर....
रतन जडित हीरों का हार
जब लंकापति ने नजर किया
हनुमत ने सोचा आभूषण है
सीता की ओर किया
सीताजी ने हनुमत को दे दिया
इसे पहन मेरे लाला
एक ज़रा सी बात की खातिर.....
हार हाथ में लेकर हनुमत
घुमा फिरा कर देख रहे
नही समझ में जब आया
तब तोड़ तोड़ कर फेंक रहे
लंकापति मन में पछताया
पड़ा है बन्दर से पाला
एक ज़रा सी बात की खातिर.....
लंका पति का धीरज टूटा
क्रोध की भड़क उठी ज्वाला
भरी सभा में बोल उठा
क्या पागल हो अंजनी लाला
हार कीमती तोड़ दिया
क्या पेड़ का फल समझ डाला
एक ज़रा सी बात की खातिर....
हाथ जोड़कर हनुमत बोले
मुझे है क्या कीमत से काम
मेरे काम की चीज नही है
ज़िसमें नही बसते सीताराम
राम नजर न आया इसमें
तब यूं बोले बजरंगवाला
एक ज़रा सी बात की खातिर......
इतनी सी बात सुनी हनुमत की
बोल उठा लंका बाला
तेरे में क्या राम बसा है
सभा बीच में कह डाला
चीर के सीना हनुमत ने
सियाराम का दरश दिखा डाला
एक ज़रा सी बात की खातिर
सीना फाड दिखा डाला......
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