ना स्वर है ना सरगम ना लय ना तराना है

by - January 20, 2020

ना स्वर है ना सरगम ना लय ना तराना है
हनुमान के चरणोंमें बस एक फूल चढ़ाना है
ना स्वर है ना सरगम ना लय ना तराना है

तुम बाल समयमें प्रभु सूरजको निगल डाले
अभिमानी सुरपति के सब दर्प मसल डाले
बजरंग हुए तब से संसार ने ये जाना है
हनुमान के चरणोंमें बस एक फूल चढ़ाना है

सब दुर्ग ढहा करके लंका को जलाए तुम
सीताकी खबर लाए लक्ष्मण को बचाए तुम
प्रिय भरत सरिस तुमको श्रीराम ने माना है
हनुमान के चरणोंमें बस एक फूल चढ़ाना है

जब राम नाम नहीं पाया तुमने नगीने में
तुम चीर दिए सीना सियाराम थे सीने में
विस्मित जग ने देखा कपि राम दीवाना है
हनुमान के चरणोंमें बस एक फूल चढ़ाना है

हे अजर-अमर स्वामी तुम हो अंतर्यामी
मैं दीन-हीन चंचल अभिमानी और अज्ञानी
तुमने जो नजर फेरी फिर कौन ठिकाना है
हनुमान के चरणोंमें बस एक फूल चढ़ाना है


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