बसते हैं रोम रोम में जिनके श्रीराम
बसते हैं रोम रोम में जिनके श्रीराम
भक्तों में भक्त परम श्री हनुमान
बसते हैं रोम-रोम में जिनके श्रीराम
जिनको असंभव ना कोई भी काम
शक्ति में शक्ति चरम श्री हनुमान
भक्ति और शक्ति के हैं अदभुत धाम
जय जय राम बोलो जयजय हनुमान
बसते हैं रोम रोम में जिनके श्रीराम
रघुवर के जैसे सब संकट टारे
मूर्छित लक्ष्मण के ज्यों प्राण उबारे
तुमको ही देख रहे हैं भक्त तुम्हारे
संकट मोचन संकट टारो हमारे
बसते हैं रोम रोम में जिनके श्रीराम
सुरसा को जैसे बुद्धिबल से मात दी
सोने की लंका जैसे पलमें राख की
सुमति के साथ रहे कृपा आपकी
सर पर रहे छाया तुम्हारे श्रीहाथ की
बसते हैं रोम रोम में जिनके श्रीराम
जैसे जहां राम है हनुमान वहां पर
वैसे हनुमान जहां है राम वहां पर
आशीषदो भक्तोंको ज्ञानमिले वहांपर
बसते हैं रोमरोम में जिनके श्रीराम
भक्तों में भक्त परम श्री हनुमान
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