चले आओ ढूढो न कोई बहाना
चले आओ ढूढो न कोई बहाना
सोचो ज़रा कन्हैया रिश्ता है पुराना
चले आओ ढूढो न कोई बहाना
मझधार में नैया है .मजबूर खिवैया है
नैया का खिवैया अब तो कन्हैया है
अब पार लगाना प्रभू दूर किनारा है
अब तेरे सिवा प्रभू कौन हमारा है
इस तन में रमे हो इस मन में रमे तुम
तुझी से जुडी कहानी तुम्ही देते दानापानी
जो कुछ है मेरे पास सब दिया तुम्हारा है
अब तेरे सिवा प्रभू कौन हमारा है
एक आश तुम्हारी है विस्वास तुम्हारा है
घनश्याम दरश देदो कोई न हमारा है
संकट की घडी में मैंने तुम्हें पुकारा है
अब तेरे सिवा प्रभू कौन हमारा है
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