पवन सुत तुम कहाते हो
पवन सुत तुम कहाते हो
हवा के संग चलते हो
नही तुमसा कोई यहां दूजा
गजब के काम करते हो
समन्दर लांघ के भगवन
जला डाला था लंका को
बलायें दूर करके सब
सभी के दुख हरते हो
पवन सुत तुम कहाते हो....
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राम के भक्त ओ हनुमत
सिया के तुम दुलारे हो
उन्ही का काज करने को
ज़मीं पर अा पधारे हो
पवन सुत तुम कहाते हो .....
तुम्हीं ने चीर कर सीना
दिखा डाला था ज़माने को
बसे सियाराम के दिल में
उन्हीं के तुम सहारे हो
पवन सुत तुम कहाते हो ....
शरण हम सब तेरे हैं
हमें तुम आशीष दे देना
बुराई के सदा मेरे भगवन
दसों शीश तुम ले लेना
पवन सुत तुम कहाते हो ....
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