सब कुछ बदल जाता है यहां
सब कुछ बदल जाता है यहां
लेख विधि का बदलता नहीं
प्रभू का मान भले टल जाये
भगत का मान कभी टलता नहीं
मीरा हो गयी तेरी दीवानी
एक तारे पे भजन किया
तेरे भगत को चैन से मोहन
राणा ने उसे जीने न दिया
फिर कोई न करता भरोसा
विष अम्रत जो बनता नहीं
प्रभू का मान भले टल जाये .....
भरी सभा में द्रुपद का चीर
दुशासन जब हरने लगा
पांडव कुल की पटरानी की
आँख से आंशू झरने लगा
फिर कोई न करता भरोसा
चीर द्रोपदी का जो बढता नहीं
प्रभू का मान भले टल जाये ......
हे प्रभो तेरे भगत को
मेरा बारम्बार प्रणाम है
वनवारी मैं किस लायक हूँ
देना चरणो में स्थान है
प्रभू से मिलना बड़ा सरल है
भगत प्रभू का मिलता नही
प्रभू का मान भले टल जाये
भगत का मान कभी टलता नहीं
0 comments