सांवरा जब अपने साथ है
सांवरा जब अपने साथ है
हमको डरने की क्या बात है
इसके रहते कोई कुछ कहे
बोलो किसकी औकात है
सांवरा जब अपने साथ है
छायीं काली घटायें तो क्या
इसकी छतरी के नीचे हूँ मैं
आगे आगे यह चलता मेरे
इसने पकडा मेरा हाथ है
हमको डरने की क्या बात है
साँवरा जब अपने साथ है
इसकी महिमा का वर्णन करुं
मेरी वाणी में वो दम नहीं
जब से इसका सहारा मिला
फिर सताये कोई गम नहीं
श्याम करता करामात है
साँवरा जब अपने साथ है
क्यों मैं भटकूँ यहां से वहां
इसके चरणो में है बैठना
झूठे स्वारथ के रिस्ते सभी
श्याम से अपना रिस्ता बना
ये करता प्रेम से मुलाकात है
साँवरा जब अपने साथ है
हमको डरने की क्या बात है
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