ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
जिसदिन जुबांपे मेरी आए न शिवका नाम
ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
मन मंदिर में वास है तेरा तेरी छबी बनाई
तेरे दर्शन को बनके जोगन शरण में आई
तेरे ही चरणों पाया मैंने यह विश्राम
ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
तेरी खोज में ना जाने कितने युग मेरे बीते
अंत में काम क्रोध मद हारे भोले तुम जीते
मुक्त किया तूने मुझको शत-शत प्रणाम
ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
सर्वदया संपन्न तुम्हीं हो हे मेरे परमेश्वर
दर्शन देकर धन्य करो मेरे प्रभु महेश्वर
भवसागर से तर जाऊंगी लेकर तेरा नाम
ऐसी सुबह न आए आए न ऐसी शाम
जिसदिन जुबांपे मेरी आए न शिवका नाम
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