मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तू सर्वब्यापक जग में कण कण में समाया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तुझे नरसी ने टेरा श्याम कोई नही मेरा
तेने क्रपागढ जाके कैसा भात भराया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तुझे द्रोपदी ने टेरा कान्हा कोई नही मेरा
तूने भरी सभा में जाके कैसा चीर बढाया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तुझे मीरा ने टेरा मोहन कोई नही मेरा
तूने जहर के प्याले को कैसा अम्रत बनाया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तुझे भगतों ने टेरा श्याम कोई नही मेरा
तूने गीता सार सुनाके कैसा ग्यान कराया है
मोहन तेरी महिमा का कोई भेद न पाया है
तू सर्वब्यापक जग में कण कण मे समाया है
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