राधेराधे जपो सुबह शाम ब्रज की गलियों में

by - January 20, 2020

राधेराधे जपो सुबह शाम ब्रज की गलियों में
चाहे ढल जाए जीवन की शाम बृज गलियों में
राधेराधे जपो सुबह शाम बृज की गलियों में

वृंदावन को छोड़ कन्हैया दूर कभी ना जावे
जो गावे श्री राधे राधे उसके संग हो जावे
वंशी कान्हाकीबाजे आठोंयाम ब्रज गलियोंमें
राधे राधे जपो सुबह शाम ब्रज की गलियों में

जिसकी मर्जी बिना जगमें पत्तानहीं हिलपावे
धरतीका चप्पाचप्पा जिसकी रचना कहलावे
उसे कहते हैं राधे का गुलाम व्रज गलियों में
राधे राधे जपो सुबह शाम व्रज की गलियों में

जिसने ब्रज को देखा उसने बातें हैं ये मानी
यमुना यम को दूर करें भव तारें राधा रानी
कण-कण में है चारों धाम ब्रज की गलियों में
राधेराधे जपो सुबह श्याम व्रजकी गलियोंमें

ब्रज के कण कण में बस राधे-राधे ही गूंजे
भूल के सारी दुनिया जो राधे चरणों को पूजे
उन्हें मिल जाता है घनश्याम ब्रज गलियों में
राधेराधे जपो सुबह शाम ब्रज की गलियों में
चाहे ढल जाए जीवनकी शाम ब्रजगलियों में


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