बैकुंठ में जाकर मनमोहन
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
बंसी को बजाना भूल गए
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
ग्वालों के संग में रहते थे
गैयों को वो चराते थे
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
गैयों का चराना भूल गए
सखियों के संग रहते थे
गलियों में रास रचाते थे
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
सखी संग रासरचाना भूलगए
जमुना के तट पर जाते थे
नाग नाथ कर आते थे
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
नागों का नाथना भूल गए
वो गिरवर तट पर जाते थे
गिरवर पर्वत को उठाते थे
बैकुंठ में जाकर मनमोहन
गिरवर का उठाना भूल गए
बंसी को बजाना भूल गए
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