मैं नित -नित तुम्हें मनाऊँ कान्हा

by - January 20, 2020

मैं नित -नित तुम्हें मनाऊँ कान्हा
तुम जीवन मेरा बना दो कान्हा
मैं नित -नित तुम्हे मनाऊं कान्हा

मैं हर रोज तुम्हें सजाऊँ कान्हा
तुम अंतर मेरा सजा दो कान्हा
मैं हरदम शीश तुम्हें झुकाऊं कान्हा
तुम मस्तक मेरा उठा दो कान्हा

मैं चित्र तुम्हारा बनाऊं कान्हा
तुम चरित्र मेरा बना दो कान्हा
मैं चरणों में फूल चढ़ाऊँ कान्हा
तुम फूलों सा मुझे महका दो कान्हा

मैं आंसुओं से चरण पखारुं कान्हा
तुम अपने नैनों में मुझे बसालो कान्हा
मैं हरपल तस्वीर तेरी निहारुं कान्हा
तुम बिगड़ी तकदीर मेरी बनादो कान्हा

मैं आराधना करुं तुम्हारी कान्हा
तुम राधिका मुझे बना लो कान्हा
मैं अधूरी हूं तुम बिन कान्हा
तुम सम्पूर्ण मुझे बना दो कान्हा
मैं नित -नित तुम्हें मनाऊँ कान्हा
तुम जीवन मेरा बना दो कान्हा


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