हे शिव दयामय दीन पालक
हे शिव दयामय दीन पालक
अज विमल निष्काम हो
हे जगतपति जग व्याप्त
जगदा धार जग विश्राम हो
दिवस निशि जिसकी प्रबल
भय रोग की हो बंदना
उस दुखी जन के लिए तुम
वास्तविक सुख धाम हो
कलेश इस कलिकाल का
उसको कभी व्यापे नहीं
हृदय में जिनके तुम्हारा
ध्यान आठों पहर याम हो
एक ही अभिलाषा है मेरी
पूरी इसे कर दो प्रभु
मेरी इस रसना पर सदा
शिव शिवा का नाम हो
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