बड़ों ही प्यारो नटखट नंदलाल है
बड़ों ही प्यारो नटखट नंदलाल है
लड्डू गोपाल मेरो लड्डू गोपाल है
बड़ों ही प्यारो नटखट नंदलाल है
लोरी से सुलाती हूं लोरी से उठाती हूं
निकल जाए हाथों से जब नहलाती हूं
कलियों से कोमल रसीला रसदार है
लड्डू गोपाल मेरो लड्डू गोपाल है
करके श्रृंगार इसे लाड लड़ाती हूं
माखन मिश्री का भोग लगाती हूं
पलना में झूम झूम होता निहाल है
लड्डू गोपाल मेरो लड्डू गोपाल है
गोल मटोल लाल लाल गाल हैं
नैन रंगीले जाके घुंघराले बाल हैं
लाल गुलाबी होंठ रूप रसाल है
लड्डू गोपाल मेरो लड्डू गोपाल है
लड्डू गोपाल से अटूट मेरा नाता है
जाऊं मैं जहां साथ -साथ जाता है
सुन सुरताल नाच उठता गोपाल है
लड्डू गोपाल मेरो लड्डू गोपाल है
बडो ही प्यारो नटखट नंदलाल है
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