हे शिव शंकर हे अविनाशी
हे शिव शंकर हे अविनाशी
घट घट वास करे कैलासी
हे शिव शंकर हे अविनाशी
देवों में महादेव कहलाए
सर्पों को गले का हार बनाए
तेरी महिमा तू ही जाने
तुमसे गंगा तुमसे काशी
हे शिव शंकर हे अविनाशी
काशी और कैलाश भी तू है
भक्तों की हर आश भी तू है
दयानिधे तुम अवधर दानी
करते पल में दूर उदासी
हे शिव शंकर हे अविनाशी
बेलपत्र जल से खुश होते
भक्तों को वांछिंत फल देते
तुम सम कौन दयालु दाता
तेरे प्रेम की अखियां प्यासी
हे शिव शंकर हे अविनाशी
घट घट वास करे कैलाशी
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