दुख का बादल जब जब मुझ पर छाया
दुख का बादल जब जब मुझ पर छाया
पवनवेग से उडकर मेरा हनुमत आया
दुख का बादल जब जब मुझ पर छाया
जब जब संकट आया है
मैंने इसको सामने पाया है
दुनिया ने सारे रिश्ते तोड़े
इसने साथ निभाया है
जब जब संकट आया है
स्वारथ के इस संसार में
बस यही एक सहारा है
भक्त तेरा तो यह कहता
हनुमत तू ही हमारा है
जब जब संकट आया है
इसका सच्चा दरबार है
इसकी दया अपार है
इसकी रहमत से चलता
मेरा घर ये संसार है
जब जब संकट आया है
मेरा हनुमत सामने आया है
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