लगन लगी दर्शन की करदो पूरी मन की
लगन लगी दर्शन की करदो पूरी मन की
आस जगी दर्शन की करदो पूरी मन की
लगन लगी दर्शन की करदो पूरी मन की
शिव शंकर के राज दुलारे
मां गिरिजा की आंखों के तारे
मुझे चाह नहीं है धन की
आश लगी दरशन की ....
ना मैं चाहूं महल अटरिया
तुमरे दरस को तरसे नजरिया
प्यास बुझादो इन नैनन की
आस लगी दरशन की ......
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता
जोड़ लिया मैंने तुमसे नाता
कृपा हो जाए भगवन की
आस लगी दरशन की........
ज्ञान उजागर गुण के सागर
करुणा भरी छलकादो गागर
ज्योति जगा दो जीवन की
आस लगी दरशन की......
जिसने तुम्हारे रुप को देखा
मिट गई उसके पाप की रेखा
दासी बना लो चरणन की
आस लगी दरशन की......
सोया हुआ मेरा भाग्य जगा दो
उजड़ी हुई मेरी दुनिया बसा दो
सुनलो दाता मुझ निर्धन की
आस लगी मुझे दरशन की
कर दो पूरी मेरे मन की
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