भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है

by - January 18, 2020

भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है
एक घर में अंधेरा है एक घर में दिवाली है
भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है

क्या अजब तमाशा है क्या खेल रचाया है
यह तेरा भेद कोई भी जान न पाया है
अरबों का मालिक है पर गोद से खाली है
भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है

कोई कितना सुंदर है फूलों से सजाया है
कवि कविता करके गुण रूप में गाया है
कुरुप कोई कितना जैसे रजनी काली है
भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है

तकदीर की हलचल है या कर्म का पाशा है
दरदर का भिखारी है एक हाथ में काशा है
भर पेट नहीं मिलता भोजन का सवाली है
भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है

संसार पहेली है उलझन ही उलझन है
बेमोल यहां रिश्तो का यह कैसा बंधन है
कुछदिनके लिए हमनेये दुनिया बसाली है
भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है
एक घर में अंधेरा है एक घर में दिवाली है


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