प्रभु तुम हो सागर बूंद भर मैं
प्रभु तुम हो सागर बूंद भर मैं
तुम गगन रज कण हूं मैं
आराध्य हो तुम भक्त हूं मै
गर स्वामी तुम गण हूं मै
हे विनायका हे गजानना
ले लो मुझे अपनी शरण में
दिन में भजूं रात को भजूं
हर पल भजूं तेरे नाम को
मन में मेरे वह शक्ति दो
पलभर ना भूलूं तेरे नाम को
हे विनायका हे गजानना
रहे शीश तेरे ही चरण में
प्रभु तुम हो सागर बूंद भर मैं
मानव हूं मैं माया का ही
राज है इस मन पर मेरे
गुण तो प्रभु एक भी नहीं
जीवन में सौ अवगुण भरे
हे विनायका हे गजानना
है मोक्ष तेरे ही चरण मे
प्रभु तुम हो सागर बूंद भर में
तुम गगन रज कण हूं मैं
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