राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
तुम बिन और न हो कुछ मन में
राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
अपना जान मुझे स्वीकारो
भ्रम भूलों से बेगि उवारो
मोह जनित संकट सब टारो
उलझा हूं मैं भव बंधन में
राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
तुम जानो सब अन्तरयामी
तुम बिन कुछ भाये ना स्वामी
प्रेम बेल उर अन्तर जानी
तुम ही सार बस्तु जीवन में
राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
निज चरणो में तनिक ठौंर दो
चाहे स्वामी कुछ और न दो
केवल अपनी तनिक क्रपा करदो
रामामृत भर दो मेरे जीवन में
राम विराजो मेरे ह्रदय भवन में
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