ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सवार
हे जगदंबे मैया भक्तन की सुनले पुकार
ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सवार
हे जगदंबे मैया भक्तन की सुनले पुकार
नाव हमारी गोता खावे पड़ी बीच मझधार
भवसागर से पार उतारो तू ही खेवनहार
टेर सुन दौड़ी आयके करदे तनिक उपकार
ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सवार
ध्वजा नारियल भेंट चढ़ाने ले फूलन को हार
मेवा और मिष्ठान् सुपारी भर भर परसे थार
खडे मंदिर में करें विनती कई कई बार
ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सबार
पंडा और पुजारी तेरी आरती रहे उतार
नृत्य करें जोगनिया है रही जय जयकार
जोड़ कर दोनों तोकू देखे हम नजर पसार
ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सबार
तनमन धन सब अर्पण तुझको हम बलिहार
पग पसार पीये चरणामृत तेरा बारंबार
कितने ही तर गए मैया कर देगी बेढा पार
हे जगदंबे मैया भक्तन की सुन ले पुकार
ओढ़के लाल चुनरिया आ जाओ सिंह सवार
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