दुखों से जो ठोकर खाई न होती
दुखों से जो ठोकर खाई न होती
तो प्रभु की मधुर याद आई न होती
दुखों से जो ठोकर खाई न होती
न दिखते प्रभु के ये शुभ रंग न्यारे
न लगते ये मन को प्राणों से प्यारे
जो लगती जगत की पिटाई न होती
तो प्रभु की मधुर याद आई न होती
जो प्राणी जगत में निरादर न पाता
कभी भी न लगता ये कटु नेह नाता
जो मित्रों की जग से जुदाई न होती
तो प्रभु की मधुर याद आई न होती
कहो कैसे फिरता तू होकर दीवाना
जगत जो न अपना ये होता बिराना
बिरह की व्यथा जो सताई न होती
तो प्रभु की मधुर याद आई न होती
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