धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
तीन लोक बस्ती में बसाए आप बसे वीराने में
धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
जटाजूट के मुकुट शीश पे गले मुंडन की माला
माथे पर छोटा चंद्रमा कपाल में करके प्याला
धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
तीन लोक बस्ती में बसाए आप बसे वीराने में
जिसे देख भय व्यापे गले बीच लपेटे काला
और तीसरे नेत्र में तेरे महाप्रलय की ज्वाला
धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
तीनलोक बस्ती में बसाए आप बसे वीराने में
पीने को हर भंग रंग है आक धतूरा खाने में
तीनलोक बस्ती में बसाए आप बसे वीराने में
धन्य धन्य भोलेनाथ कौड़ी नहीं खजाने में
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