बर दीजे हनुमान हृदय में
बर दीजे हनुमान हृदय में
ज्ञान की ज्योति ये जलती रहे
जहां तलक जाए मेरी दृष्टि
आपकी मूरत दिखती रहे
नित्य पल हरपल यूं निरंतर
आप ही को प्रभु ध्याऊ मैं
जब भी विपदा आए कोई
तो शरण तिहारी आऊं मैं
आपके चरणों में ही रहकर
श्रद्धा हर पल बढ़ती रहे
जहां तलक जाए मेरी दृष्टि.....
मन व्याकुल हो या हरषाए
सदा रहूं मैं एक समान
भाग्य लिखी को मैं स्वीकारु
समझ विधि का यही विधान
साहस और पराक्रम की
सब सीख आपसे मिलती रहे
जहां तलक जाए मेरी दृष्टि....
आप सत्य के ही प्रतीक हो
संतो से मैं सुनता आया
बहुरूप हैं और निर्भीक हैं
बड़ी प्रबल सुंदर काया
आपके गुण चतुराई की पूंजी
भक्तों में भी बटती रहे
जहां तलक जाए मेरी दृष्टि
आपकी मूरत दिखती रहे
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