अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
इस भव बंधन के भय से हमें उवारो
अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
तुम कृपा सिंधु रघुनाथ नाथ हो मेरे
मैं अधम पड़ा हूं चरण कमल पर तेरे
हे नाथ तनिक तो हमरी ओर निहारो
अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
मैं अति पंगु दीन हीन छीन हूं दाता
तुम्हें छोड़ कित जाऊं तुम्ही पितु माता
मैं गिर न कहीं जाऊं प्रभु आप सबारो
अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
मन काम क्रोध मदलोभ माही में अटका
मन जीव आज लाख योनि है भटका
अब आवागमन छुड़ाए नाथ मोहे तारो
अब कृपा करो श्रीराम नाथ दुख टारो
इस भव बंधन के भय से हमें उबारो
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