मेरे जन्मों के साथी साजन
मेरे जन्मों के साथी साजन
मैं तुम्हें कभी तो पाऊंगी
मेरे जन्मो के साथी साजन
जोगन का वेश बना करके
इस जग से आंख चुरा करके
मन के इक तारे पर साजन
मै गीत बिरहे के गाऊंगी
मैं तुम्हें कभी तो पाऊंगी
पग नूपुर की झंकारो से
भावो भरे मधुर इशारों से
सांसो के पंख लगा करके
तारों तक दौड़ लगाऊंगी
मैं तुम्हें कभी तो पाऊगी
तुम छुपना राधा के मन में
मधुवन की रंगीली कुंजन में
मैं बनकर ललिता की वीणा
थिरको पर तुम्हें नचाऊंगी
मैं तुम्हें कभी तो पाऊंगी
ओ श्याम सलोने मनमोहन
मन चोर मुरारी मधुसूदन
इक प्रेम की डोर से बांध हरी
मन मंदिर में विठलाउंगी
मेरे जन्मो के साथी साजन
मैं तुम्हें कभी तो पाऊंगी
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