क्यों गुमान करे काया का मन मेरे kyo gumaan kare kaaya ka mann mere
क्यों गुमान करे काया का मन मेरे
एक दिन छोड़कर ये जहां जाना है
नाम राम का सुमिर मन मेरे बावरे
एक दिन छोड़कर ये जहां जाना है
तूने संसार को तो है चाहा मगर
नाम प्रभु का है तूने तो ध्याया नहीं
मोह ममता में तू तो फसा ही रहा
ज्ञान गुरु का हृदय से लगाया नहीं
मौत नाचे तेरे सर पर ओ बावरे
एक दिन छोड़कर ये जहां जाना है
आएगा जब बुलावा तेरा बाबरे
छोड़ कर इस जहां को जाएगा तू
साथ जाएगा ना एक तिनका कोई
प्यारे रो- रो बहुत पछताएगा तू
आज से अभी से लगजा तू राम में
एक दिन छोड़कर ये जहां जाना है
क्यों गुमान करे काया का मन मेरे
नाम राम का सुमिर मन मेरे बावरे
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