चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
परम पावन परम सुंदर परममंगल धाम का
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
लिया जिसने कभी रामनाम भय भ्रम भूल से
तर गया वह भी तुरंत बंधन कटे जड़ मूल से
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
परम पावन परम सुंदर परम मंगल धाम का
है सभी पातक पुराने घास सूखे के समान
भस्म करने को उन्हें राम नाम पावक समान
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
परम पावन परम सुंदर परम मंगल धाम का
सूर्य उगते ही अंधेरा नाश होता है यथा
सभी अघ है नष्ट होते राम के स्मृति से तथा
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
परम पावन परम सुंदर परम मंगल धाम का
जाप करते जो चतुर नर सावधानी से सदा
वे न बधते भूलकर यमपास दारुग में कदा
चाहता जो परमसुख तू जापकर रामनाम का
परम पावन परम सुंदर परम मंगल धाम का
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