यदि नाथ का नाम दयानिधि है
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
तो दया भी करेंगे कभी न कभी
दुखहारी हरि दुखिया जन के
दुख कलेस हरेंगे कभी न कभी
जिस अंग की शोभा सुहावनी है
जिस श्याममल रंग में मोहनी है
उस रूप सुधा से सनेहियो के
दुरग प्याले भरेंगे कभी न कभी
जहां गीध निषाद का आदर है
जहां व्याध अजामिल का घर है
वही भेष बनाकर उसी घर में
हम जा ठरहेंगे कभी न कभी
करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हें
चरणामृत पान कराया जिन्हें
सरकार अदालत में ये गवाह
सभी गुजरेंगे कभी न कभी
हम द्वार पर आपके आके पडे
मुद्दत से इसी जिद पर है अडे
भवसिंधु तरे जो बड़े से बड़े
तो ये बिंदु तरेंगे कभी न कभी
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