मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे

by - January 18, 2020

मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे
हाथ ये फैले रहते सामने तेरे
मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे

याद वो दिन मुझे खाली जेब वो मेरा
दर-दर भटकना हाय दर-दर भटकना
चारों तरफ थे मेरे गम के अंधेरे
आखिर मैं भोले आया द्वार पे तेरे
मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे

मेरी गरीबी के दिन थे वह कैसे
तूने ही जाना भोले तूने ही जाना
तेरी कृपा से परिवार खा रहा खाना
देने को कुछ भी बाबा पास ना मेरे
दवा जा रहा हूं भोले कर्ज में तेरे

मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे
हाथ ये फैले रहते सामने तेरे
मांगते रहते तुझसे सांझ सवेरे


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