राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

by - January 19, 2020

राधे राधे बोल रस्ते रस्ते
मिल जाएंगे श्याम सस्ते सस्ते
बीतेगे दिन रात हंसते हंसते
राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

भटकते हैं इस दुनिया की माया में
अहंकार करते हैं इस काया पे
बीता ये जीवन यूं ही सजते सजते
मिल जाएंगे श्याम सस्ते सस्ते
राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

दिया ज्ञान क्यों कृष्ण ने गीता में
क्यों लीला रची राम और सीता ने
तुम होकर अनजान दुर्र्गुण मैं फंसते
राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

राधे रानी का सुमिरन सदा जो करे
मोक्ष पा जाते हैं प्राणी भव से तरे
गोवर्धन घनश्याम तन-मन बसते
राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

पता पूछते हो तुम गली हर गली
ऐसे नटखट कन्हैया से राधे भली
पा जाओगे श्याम राधे राधे जपते
राधे राधे बोल रस्ते रस्ते

मिल जाएंगे श्याम सस्ते सस्ते


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