रस रुप भरी श्यामा प्यारी
रस रुप भरी श्यामा प्यारी
रस रूप भरे मेरे बांके बिहारी
रस रुप भरी श्यामा प्यारी
गौर वर्ण नीलांबर सोहे
मोर मुकुट पीतांबर मोहे
जोड़ी पे जाऊं मैं बलिहारी
रस रुप भरी श्यामा प्यारी
रस रुप भरे मेरे बांके बिहारी
इत माथे बिंदिया सोह रही
उत भ्रकुटी मन को मोह रही
है रही रस की बरसा प्यारी
रस रुप भरी श्यामा प्यारी
रस रुप भरे मेरे बांके बिहारी
इत घुंघरू की झंकार बाजे
उत मुरली अधर सुहानी वाजे
दोनों की धुन न्यारी न्यारी
रस रुप भरी श्यामा प्यारी
रस रुप भरे मेरे बांके बिहारी
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